राज योग साधना के अंदर ध्यान की अवस्था में प्रकाश के दृश्य किस प्रकार के दिखाई देते हैं
ध्यान की अवस्था में हमारी कुंडलिनी के मूलाधार से लेकर आज्ञा चक्र तक के 6 चक्र जागृत हो गए सहस्त्रार चक्र में पहुंचने पर शून्य की अवस्था का अनुभव घबराहट भरा होने के कारण हमारी कुंडलिनी बंद हो गई। इसके बाद अपना सहस्त्रार चक्र खोलने के लिए मैंने फिर से अपनी उसी साधना को जारी रखा, लेकिन अबकी बार मुझे पहले जैसे दृश्य न दिखाई देकर प्रकाश के दृश्य इस तरह से दिखाई दिए
दृश्य नंबर 1
जब हम आंखें बंद करके ध्यान लगाते हैं हमारे बाई तरफ एक दूधिया प्रकाश से चमकता हुआ अर्धचंद्र प्रकट होता है। कभी-कभी यह एक चमकीले बिंदु के समान प्रकट होता है और फिर धीरे-धीरे अर्धचंद्र का रूप ले लेता है। अर्धचंद्र के बाद उसके अंदर वाला आधा गोला एक रेखा द्वारा पूर्ण गोले का आकार ले लेता है इसके बाद पूरे बाहरी गोले पर प्रकाश फैल जाता है तथा वह एक चमकती हुई रिंग का आकार ले लेता है उसके अंदर का खाली गोला लाल रक्त वर्ण के लाल रंग से चमक रहा होता है तथा उसके बाहर का गोला सफेद दूधिया रंग से चमक रहा होता है।
यह गोला जब बना था तब मस्तक के बाएं तरफ था लेकिन जब इस गोले ने अपना पूर्ण आकार लिया तब यह चमकता हुआ गोला ठीक मस्तक के सामने आ गया। यह चमकता हुआ गोला कुछ देर तक बना रहा फिर धीरे-धीरे गायब हो गया।
दृश्य नंबर दो
जब दृश्य समाप्त हो जाते हैं तो हम ध्यान की एक विशिष्ट प्रक्रिया को दोबारा करते हैं हमारे सामने फिर प्रकाश फैल जाता है और यह प्रकाश बहुत तेज होता है। इसके बाद बहुत ही अद्भुत प्रकाशमय चमकती हुई डिजाइन बन जाती है। इस डिजाइन के बाद डिजाइन में परिवर्तन होकर कई तरह की डिजाइनें बनती बिगड़ती रहती हैं।
इसके बाद सामने का पूरा पर्दा छोटे-छोटे नीले बिंदुओं से भर जाता है यह सभी बिंदु थोड़ी थोड़ी दूर पर स्थित होते हैं और इन बिंदुओं के बीच बीच में सुई की नोक के बराबर के छोटे-छोटे बिंदु सफेद रोशनी के साथ चांदी के समान चमक रहे होते हैं। धीरे-धीरे यह दृश्य फिर से गायब हो जाता है।
दृश्य नंबर 3
ध्यान की प्रक्रिया फिर से दोहराते हैं। सफेद रंग के प्रकाश के बीच काले रंग की आड़ी तिरछी रेखाएं एक दूसरे को क्रॉस करके चल रही होती हैं। जब इनका चलना बंद होता है तो सामने से चेहरे के ऊपर गोलों की बरसात जैसी होने लगती है। दूर से छोटे-छोटे गोले आते हुए दिखाई देते हैं जैसे ही वह पास आते जाते हैं उनका आकार बढ़ता जाता है। इस प्रकार के गोलों की बरसात काफी देर तक होती रहती है
दृश्य नंबर 4
इन बरस रहे गोलों की बरसात जब बहुत तेज हो जाती है तब ऐसा लगने लगता है जैसे कि सफेद आकाश उबल रहा है। इसके बाद यह उबलता हुआ आकाश और भी अद्भुत प्रकाश से युक्त हो जाता है। इस आकाश के कई तरह के बहुत ही अद्भुत दृश्य दिखाई देते हैं।
प्रकाश के दृश्यों को काफी देर तक स्थिर रखने की विधि
ध्यान की अवस्था में बहुत ही अद्भुत प्रकाश के दृश्य दिखाई देते हैं, लेकिन वह कुछ देर बाद ही चले जाते हैं जबकि हम चाहते हैं कि यह अद्भुत दृश्य इसी तरह से लगातार दिखाई देते रहें। इसके लिए हम विभिन्न प्रयोग करते रहे। दृश्यों को स्थिर रखने के लिए हम उसी तरह हाथ पांव मारते रहे जिस तरह से हम पानी में तैरना सीखने के लिए अपने हाथ पांव चलाते हैं।
अपने उद्देश्य में मुझे सफलता भी मिली। प्रकाश के दृश्य देखने की विधि के साथ अपनी श्वास पूरी तरह बाहर निकाल दें और वही पर अपनी सांस को रोक दें इसके बाद अपने पेट को ऊपर सिकोड़ने से जो अंदर प्रकाश पहले से दिखाई दे रहा था वह प्रकाश और भी बहुत तेज दिखाई देने लगता है जब हमारी सांस लगता है कि अब नहीं रुकेगी कुछ समय प्रकाश बहुत ही अधिक तेज हो जाता है लेकिन फिर हमें सांस लेनी पड़ती है इसी सांस बाहर निकालनें तथा अपने पेट को ऊपर की तरफ सिकोड़ने से भीतर दिखाई देने वाला प्रकाश वहीं पर स्थिर हो जाता है बल्कि प्रकाश और अधिक तेज हो जाता है तथा नये-नये प्रकाश के दृश्य दिखाई देने लगते हैं।
जितनी देर तक हम इस प्रक्रिया को दोहराते रहते हैं हम अद्भुत प्रकाश को लगातार देखते रहते हैं।
दृश्य नंबर 5
एक सफेद प्रकाश का गोला दिखाई देता है। इस गोले की बाहरी कक्षा में एक के बाद एक कई गोले और भी होते हैं जोकि अलग-अलग रंग के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं केंद्र में एक छोटा सा गोला होता है। जब हम सांस बाहर निकालने और अपने पेट को ऊपर की तरफ सिकोड़ने की प्रक्रिया शुरू करते हैं। तो यह प्रकाश बहुत ही अद्भुत तथा तेज मर्करी जैसा प्रकाश हो जाता है।
प्रकाश का सबसे केंद्र वाला छोटा गोला एक सफेद गोभी के फूल में परिवर्तित हो जाता है उसके नीचे की तरफ जड़बाली डंडी भी निकल आती है। कुछ देर बाद वह डंडी नीले रंग की हो जाती है।
इसके बाद वह फूल गायब हो जाता है तथा उसकी जगह पर एक बड़ा सा वृक्ष दिखाई देता है इस वृक्ष के कुछ देर बाद कई वृक्ष और झाड़ियां जैसी भी दिखाई देती हैं।
दृश्य नंबर 6
प्रकाश के गोले के चारों तरफ रेडिएशन निकलने लगता है तथा आतिशबाजी जैसा दृश्य दिखाई देता है। थोड़ी देर बाद धीरे-धीरे यह रेडिएशन शांत होता जाता है। शांत होने के बाद जैसे ही हम अपने साथ बाहर निकाल कर अपने पेट को ऊपर सिकोड़ने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। उसी तरह की प्रकाशमय गोले से उसी तरह का कंपन फिर से चालू हो जाता है कुछ देर तक है आतिशबाजी जैसा दृश्य दिखाई देता रहता है इसके बाद जैसे ही यह कंपन बंद होते हैं। उसके बाद
गोले के बीच में एक बिंदु पर तेजी से कंपन चालू हो जाता है। पहले तो ऐसा लगता है कि बीच के बिंदु पर कुछ तेजी से घूम रहा हो लेकिन ध्यान से देखने पर वहां पर कुछ भी घूमता नहीं है बल्कि तेजी से कंपन हो रहा होता है।
ऐसे दृश्य देखकर ऐसा लगता है कि अब हमारा सहस्त्रार चक्र खुलने ही वाला है लेकिन ऐसे अद्भुत दृश्यों का कहीं अंत ही नहीं आता।
प्रतिदिन एक से एक बढ़कर हैरतअंगेज दृश्य दिखाई देते हैं।
आज तक की लिखी गई पुस्तकों में ध्यान की अवस्था में जितने भी दृश्य बताए गए हैं, यह हमारे द्वारा देखे गए दृश्य उन दृश्यों से बहुत अलग है, तथा बहुत अधिक हैरतअंगेज भी हैं। इन दृश्यों का कहीं भी वर्णन नहीं है।
सभी देखे गए दृश्यों का वर्णन करना संभव नहीं है।
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