यदि भगवान शिव का कोई भौतिक रूप नहीं है, तो उन्हें चित्रों और मूर्तियों में दिखाया गया रूप कैसे प्राप्त हुआ?
कुंडलिनी जागृत होने पर कई देवी देवताओं के स्वरूप उसी तरह दिखाई देते हैं जैसे कि चित्रों में छपे हुए हैं। कुंडलिनी के जाग्रत होने पर आंखें बंद करने पर मैंने स्वयं कई देवी देवताओं को देखा है।
एक चक्र में मुझे कई देवता एक लाइन में खड़े हुए दिखाई दिए वह आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ भी उठाए हुए थे उन्ही में भगवान शिव भी थे। मैं उन देवताओं की लाइन के सामने से गुजरता चला गया सभी देवता मुझे आशीर्वाद दे रहे थे।
कुंडलिनी के प्रत्येक चक्र समाप्त होने पर भी उसे चक्र से संबंधित चक्र के फोटो के साथ उसे चक्र से संबंधित देवी देवताओं के फोटो भी आते हैं। कुंडलिनी के जाग्रत होने पर ध्यान की अवस्था में देवी देवता हमारे सामने आ जाते हैं ऐसी अवस्था में भगवान शिव व अन्य देवी देवताओं का भौतिक स्वरूप भी दिखाई देता है इस स्वरूप को देखकर ऋषि मुनियों ने देवी देवताओं की मूर्तियों तथा चित्र बनाए हैं।
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