कुंडलिनी का सबसे हैरतअंगेज सत्य
तीसरा नेत्र और कुंडलिनी एक दूसरे के पूरक हैं जब हम अपने भौहों के मध्य आंखें बंद कर दृष्टि जमाने का अभ्यास करते हैं अर्थात शांभवी मुद्रा का अभ्यास करते हैं तो धीरे-धीरे सबसे पहले हमारा तीसरा नेत्र खुलना शुरू हो जाता है।
हमारा स्वयं का तीसरा नेत्र ध्यान शुरू करने की 18 दिन बाद खुला इसके बाद हमें अपने अंदर कुंडलिनी चक्र में देखने की दृष्टि मिल गई।
इसके बाद हमारे कुंडलिनी चक्र खोलना शुरू हो गए कुंडलिनी चक्र खोलने पर विभिन्न प्रकार के दृश्य लगातार दिखाई देते हैं जब हम तीन या चार चक्रों को पार कर चुके तो हमारे अंदर एक विशेष प्रकार का पावर आ गया था उस समय मैं जेल में था जब मैं कई घंटे बैठने लगा तो जेल में भारत की बंदी हमसे सट्टा का नंबर मांगने लगे मैंने उन्हें सट्टा का नंबर देने की हामी भर दी।
इसके बाद जो हुआ उसने हमें हैरत में डाल दिया
कुंडलिनी जागृत होने के जिस दौर की यह घटना है उस समय ध्यान करने पर हमें अपने ही आसन पर बैठा हुआ मैं लाइन तार पांच जगह दिखाई दे रहा था तथा पांचो आसनों पर बैठा हुआ मैं धीरे-धीरे आगे की ओर चल रहा था मैंने उस दिन आने वाले सट्टा के नंबर के बारे में विचार किया तो विचार करते ही हमारे सामने एक अंक शास्त्र का ऐसा अद्भुत चार्ट सामने आ गया जिस चार्ट पर अंग्रेजी में लिखे हुए अक्षर चारों ओर घूम रहे थे तथा चार्ट के अंदर बने हुए खानों में भी कुछ अंक जा रहे थे एक 40 अंक का नंबर घूमते घूमते चार्ट की बाउंड्री के बाहर हो गया अगले दिन जब निकलने वाला नंबर देखा तो 40 का अंक ही निकला।
यह करिश्मा सिर्फ हमारी विचार करने से हुआ अगर मैं कोई और विचार करता जैसे कि
1-धरती में खजाना कहां कहां है? तो यह भी विचार करते ही कुंडलिनी हमें खजाने का दृश्य धरती के अंदर दिखा देती।
2-अगर मैं पानी अर्थात h2o को तोड़ने की विधि द्वारा हाइड्रोजन गैस प्राप्त करने के लिए सरल विधि के लिए सोचता तो वह विधि भी कुंडलिनी हमें तुरंत ही दिखा देती।
3-किसी भी वैज्ञानिक सूत्र के बारे में जिसकी अभी खोज ही ना हुई हो केवल विचार करने से उस सूत्र की भी पूरी जानकारी तीसरी नेत्र द्वारा कुंडलिनी दिखा देगी।
कुंडलिनी एक बहुत ही रहस्यमय और हैरतअंगेज विद्या है जिसके बारे में अभी तक किसी को भी पूरी जानकारी नहीं है केवल प्राचीन पुस्तकों की आधी अधूरी जानकारी द्वारा लोगों ने उसमें अपनी कपोल कल्पित जानकारी मिलाकर उसे और भी भ्रमित कर दिया है इसलिए तीसरा नेत्र व कुंडलिनी का विषय वैज्ञानिक ढंग से शोध का विषय है।
जिस दिन सभी वैज्ञानिकों व बुद्धिजीवियों की कुंडलिनी खुलने लग जाएगी उस दिन यह देश तथा यह धरती वैज्ञानिक क्षेत्र में हजारों नहीं बल्कि लाखों साल आगे चली जाएगी।
कुंडलिनी शक्ति के बारे में हमने सिर्फ ट्रेलर ही देखा है आगे अभी सारी जानकारी अधूरी है।
Comments
Post a Comment