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विशुद्ध चक्र के अनुभव

विशुद्ध चक्र की यात्रा    विषय सूची 1-       काले सर्प के फन के ऊपर एक अर्ध नग्न लड़की 2-       आकाशीय बंगला 3-       तीन लोकों की यात्रा 4-       जब मैंने सोहम मंत्र पर ध्यान दिया तब क्या हुआ? 5-       हमारे 25 स्वरूप 6-       चलते हुए बिस्तर 7-       चलती हुई कुंडलिनी का जंक्शन 8 - देवताओं के वाहन काले सर्प के फन पर एक अर्ध नग्न लड़की रात्रि के वक्त ध्यान में मैंने एक काले सर्प को जमीन पर अपना फन फैलाए हुए देखा , अचानक उस काले सर्प के फन के ऊपर एक अर्ध नग्न लड़की प्रकट हो गई। उस लड़की का बक्षस्थल एक सफेद कपड़े की पट्टी से कई बार कसकर लपेटा हुआ था तथा उसकी कमर में भी उसके घुटनों तक एक सफेद कपड़ा लिपटा हुआ था। उसका बाकी का बदन पूरा खुला हुआ था। उस लड़की ने प्रकट होने की कुछ देर बाद हाथ जोड़कर अपने इष्ट देव को प्रणाम किया और गायब हो गई। इसके बाद...

तीसरा नेत्र खुलने में कुंडलिनी जागृत होने की सत्य घटना

तीसरा नेत्र खुलने व कुंडलिनी जागृत होने की सत्य घटना घटना 4 वर्ष पूर्व की है उधारी का तकाजा करते समय फर्रुखाबाद कंपिल पुलिस ने हमारे ऊपर फर्जी मुकदमा लगाकर फतेहगढ़ की जला जेल में भेज दिया। जेल में मैंने ध्यान लगाना शुरू कर दिया घर पर मैं दारु पीने की बुरी आदत के कारण ध्यान नहीं लगा पाता था। जेल में ध्यान के दौरान मुझे  कुछ अद्भुत सा अनुभव होने लगा। मेरे मस्तक से सफेद उल्कापिंड जैसे निकलकर घूमने लगे तथा मस्तक से बादल निकलकर दायी तरफ को जाने लगे। उसी दौरान सपने में हमें एक देवी दिखी, मैंने देवी से कहा कि तुम हमारे शरीर में प्रवेश कर जाओ, यह सुनकर देवी हमें एक कुटिया जैसे आश्रम में ले गई, वहां बहुत साधु संतों के अलावा उनके साथ एक लड़की भी थी। देवी ने हमें उस लड़की के सामने खड़ा कर दिया और कहा कि यह लड़की अब तुम्हारे ही साथ रहेगी। उस लड़की ने हमें एक भगवा रंग का चादरा दिया जिसे मैंने अपने ऊपर ओढ़ लिया। उस लड़की ने एक दूसरा चादरा और दिया जिसे मैंने अपनी कमर में तहमद की तरह लपेट लिया। हमारा भेष बिल्कुल बाबाओं जैसा हो गया। वह लड़की स्वयं लाल साड़ी पहनी हुई थी तथा हल्का सा मुंह पर घूंघट डा...

कुंडलिनी का सबसे हैरतअंगेज सत्य

तीसरा नेत्र और कुंडलिनी एक दूसरे के पूरक हैं जब हम अपने भौहों के मध्य आंखें बंद कर दृष्टि जमाने का अभ्यास करते हैं अर्थात शांभवी मुद्रा का अभ्यास करते हैं तो धीरे-धीरे सबसे पहले हमारा तीसरा नेत्र खुलना शुरू हो जाता है। हमारा स्वयं का तीसरा नेत्र ध्यान शुरू करने की 18 दिन बाद खुला इसके बाद हमें अपने अंदर कुंडलिनी चक्र में देखने की दृष्टि मिल गई। इसके बाद हमारे कुंडलिनी चक्र खोलना शुरू हो गए कुंडलिनी चक्र खोलने पर विभिन्न प्रकार के दृश्य लगातार दिखाई देते हैं जब हम तीन या चार चक्रों को पार कर चुके तो हमारे अंदर एक विशेष प्रकार का पावर आ गया था उस समय मैं जेल में था जब मैं कई घंटे बैठने लगा तो जेल में भारत की बंदी हमसे सट्टा का नंबर मांगने लगे मैंने उन्हें सट्टा का नंबर देने की हामी भर दी। इसके बाद जो हुआ उसने हमें हैरत में डाल दिया कुंडलिनी जागृत होने के जिस दौर की यह घटना है उस समय ध्यान करने पर हमें अपने ही आसन पर बैठा हुआ मैं लाइन तार पांच जगह दिखाई दे रहा था तथा पांचो आसनों पर बैठा हुआ मैं धीरे-धीरे आगे की ओर चल रहा था मैंने उस दिन आने वाले सट्टा के नंबर के बारे में विचार किया तो विच...

राज योग साधना के अंदर ध्यान की अवस्था में प्रकाश के दृश्य किस प्रकार के दिखाई देते हैं

ध्यान की अवस्था में हमारी कुंडलिनी के मूलाधार से लेकर आज्ञा चक्र तक के 6 चक्र जागृत हो गए सहस्त्रार चक्र में पहुंचने पर शून्य की अवस्था का अनुभव घबराहट भरा होने के कारण हमारी कुंडलिनी बंद हो गई। इसके बाद अपना सहस्त्रार चक्र खोलने के लिए मैंने फिर से अपनी उसी साधना को जारी रखा, लेकिन अबकी बार मुझे पहले जैसे दृश्य न दिखाई देकर प्रकाश के दृश्य इस तरह से दिखाई दिए दृश्य नंबर 1 जब हम आंखें बंद करके ध्यान लगाते हैं हमारे बाई तरफ एक दूधिया प्रकाश से चमकता हुआ अर्धचंद्र प्रकट होता है। कभी-कभी यह एक चमकीले बिंदु के समान प्रकट होता है और फिर धीरे-धीरे अर्धचंद्र का रूप ले लेता है। अर्धचंद्र के बाद उसके अंदर वाला आधा गोला एक रेखा द्वारा पूर्ण गोले का आकार ले लेता है इसके बाद पूरे बाहरी गोले पर प्रकाश फैल जाता है तथा वह एक चमकती हुई रिंग का आकार ले लेता है उसके अंदर का खाली गोला लाल रक्त वर्ण के लाल रंग से चमक रहा होता है तथा उसके बाहर का गोला सफेद दूधिया रंग से चमक रहा होता है। यह गोला जब बना था तब मस्तक के बाएं तरफ था लेकिन जब इस गोले ने अपना पूर्ण आकार लिया तब यह चमकता हुआ गोला ठीक मस्तक के सामन...

यदि भगवान शिव का कोई भौतिक रूप नहीं है, तो उन्हें चित्रों और मूर्तियों में दिखाया गया रूप कैसे प्राप्त हुआ?

कुंडलिनी जागृत होने पर कई देवी देवताओं के स्वरूप उसी तरह दिखाई देते हैं जैसे कि चित्रों में छपे हुए हैं। कुंडलिनी के जाग्रत होने पर आंखें बंद करने पर मैंने स्वयं कई देवी देवताओं को देखा है। एक चक्र में मुझे कई देवता एक लाइन में खड़े हुए दिखाई दिए वह आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ भी उठाए हुए थे उन्ही में भगवान शिव भी थे। मैं उन देवताओं की लाइन के सामने से गुजरता चला गया सभी देवता मुझे आशीर्वाद दे रहे थे। कुंडलिनी के प्रत्येक चक्र समाप्त होने पर भी उसे चक्र से संबंधित चक्र के फोटो के साथ उसे चक्र से संबंधित देवी देवताओं के फोटो भी आते हैं। कुंडलिनी के जाग्रत होने पर ध्यान की अवस्था में देवी देवता हमारे सामने आ जाते हैं ऐसी अवस्था में भगवान शिव व अन्य देवी देवताओं का भौतिक स्वरूप भी दिखाई देता है इस स्वरूप को देखकर ऋषि मुनियों ने देवी देवताओं की मूर्तियों तथा चित्र बनाए हैं।

क्या आपने कभी मॉल जैसे सार्वजनिक स्थानों पर वॉकिंग मेडिटेशन किया है? यदि हां, तो आपका अनुभव कैसा था?

मैंने सार्वजनिक स्थानों पर टहलते हुए ध्यान तो नहीं किया है लेकिन जब हमारी कुंडलिनी जागृत हो गई तो उसके बाद वह 24 घंटे चलने लगी। 24 घंटे चलने का अर्थ है कि कुंडलिनी के दृश्य लगातार 24 घंटे दिखाई देने लगे। कुंडलिनी जागृत होने के बाद लगातार 3 महीने तक उसके दृश्य दिखना जारी रहे। ऐसी अवस्था में हमें कई बार इधर-उधर जाना भी पड़ा। सार्वजनिक स्थानों पर चलते हुए भी जब मैंने अपनी आंखें बंद की तो कुंडलिनी के दृश्य चल रहे थे। उस समय ऐसा लग रहा था जैसे की हमारे मस्तिष्क में कोई फिल्म प्रोजेक्टर रखा हुआ है और उसे कोई भीतर बैठा हुआ चला रहा है जिसके दृश्य हमें दिखाई दे रहे हैं। ऐसा हमें लगातार 3 महीने तक दिखा। जब मैं गाड़ी पर बैठा मैंने खिड़की की तरफ देखा तो हमें खिड़की के बगल में हमारी गाड़ी की तरह ही एक अन्य गाड़ी भी साथ-साथ चलती हुई दिखाई दे रही थी लेकिन जैसे ही मैंने खिड़की से नजर हटाकर गाड़ी की दीवाल पर डाली, तो गाड़ी की दीवाल पर एक अन्य गाड़ी चलती हुई दिखाई देने लगी यह चित्र उसी तरह बन रहा था जैसे की फिल्म के परदे पर प्रोजेक्टर द्वारा चित्र बनता है। केवल टहलते हुए आंखें बंद करने पर भी चित्र दिखाई...

Kundlini Shakti

Apni kundli Shakti ko jagane ke liye hamare Nana ji Shri Jagdish Singh Chauhan Hari singhpur wale se sampark Karen तीसरे नेत्र का खुलना ध्यान में  सुबह दोपहर शाम दिन ढलने के अनुसार ध्यान के दृश्य में भी बदलाव होता जाता था शाम के समय बहुत ही अद्भुत दृश्य दिखाई देने लगे एक शाम दाई ओर से बाई तरफ से देवी देवताओं के पूरे शरीर में दिखने वाले आभामंडल जैसे गोलों के निकलने का सिलसिला शुरू हो गया धीरे धीरे उन गोलों मे देवियों की अस्पष्ट सी आकृतियां उभरने शुरू हो गई उसके अगले दिन शाम को फिर गोले निकले, दो गोले तो ऐसे ही निकल गए तीसरे गोले में नीचे की तरफ अचानक एक चौकोर खिड़की खुल गई उसके अंदर मैंने देखा के आदमियों की भीड़ ही भीड़ भरी हुई थी जैसे अचानक खिड़की खुली वैसे ही तुरंत बंद भी हो गई इसके दूसरे दिन गोलों में बहुत सुंदर सी  आकृतियां बनी हुई निकली। यह आकृतियां किसकी थी हमारी समझ में नहीं आया। अगला दृश्य दोपहर के ध्यान में हमें एक सड़क दिखाई दी सड़क पीछे की ओर भाग रही थी मैंने विचार किया कि कहीं मैं किसी गाड़ी पर तो नहीं बैठा हुआ हूं मेरा इतना विचार करना था कि मुझे गाड़ी का बोनट सामने...